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Wednesday, January 30, 2013

नथुराम!

खून से लथपत,
जल रही थी धरती.
हर तरफ अंधेरा था,
एक चिंगारी भडकी.
  नथुराम.  नथुराम.  नथुराम!

ऐनक पह्ने भी,
जो देख ना पाया.
अपने ही वतन को,
जिसने फाँसी चढाया,
उसका तो एक ही अंजाम,
   नथुराम.  नथुराम.  नथुराम!

सहने की सीमा
पार हो चुकी थी
अहिंसा से कब की
हार हो चुकी थी.
बंदूक से दागी गोली,
काम किया तमाम.
   नथुराम.  नथुराम.  नथुराम!

युगों युगों तक,
दिलों दिलों मे,
गुँजेगा एक ही नाम...
    नथुराम.  नथुराम.  नथुराम!

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